हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सईदी आरिया ने मस्जिद जमकारान में एक समारोह में नहजुल बलाग़ा में अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली के एक कथन का हवाला देते हुए कहा, तक़्वाधारी व्यक्ति धर्म में मजबूती' का गुण होता है, यानी उसका ईमान मज़बूत, स्थिर और दृढ़ होती है, और आसानी से डगमगाता नहीं है।
उन्होंने लोहे को पिघलाने की प्रक्रिया से एक उदाहरण देते हुए कहा,जब लोहे को भट्टी में पिघलाकर आकार दिया जाता है और फिर उसे ठंडे पानी में डाला जाता है, तो वह और अधिक मजबूत और कठोर हो जाता है। ठीक इसी तरह मोमिन का ईमान भी होता है यह मुश्किलों और दबावों में और अधिक मजबूत पक्का हो जाता है।
उन्होने आगे कहा,सच्चा मोमिन परिस्थितियों के बदलने से डगमगाता नहीं है। महंगाई या सस्ताई, अकेलापन या भीड़, साथियों की कमी या अधिकता उसके ईमान पर कोई असर नहीं डालनी चाहिए।
हुज्जतुल इस्लाम सईदी आरिया ने कुरआनी शिक्षाओं की ओर इशारा करते हुए स्पष्ट किया, पवित्र कुरआन जीत का मापदंड सिर्फ भीड़-भाड़ को नहीं मानता है, और बार-बार इस बात पर जोर दिया गया है कि कितने ही छोटे समूह ऐसे हैं, जिन्होंने अल्लाह की इजाज़त से बड़े समूहों पर विजय प्राप्त की है।
उन्होंने कहा,दुश्मनों का एकजुट होना और शैतानों का हक़ के मोर्चे के खिलाफ इकट्ठा होना मोमिनों के लिए डर और चिंता का कारण नहीं बनना चाहिए, क्योंकि जीत और अल्लाह की मदद अल्लाह की इजाज़त और उसकी इच्छा पर निर्भर है।
इस धार्मिक वक्ता ने अंत में ज़ोर देकर कहा,अगर ईमान और धर्म के मार्ग में दृढ़ता हो, तो मोमिन लोग ताकत के साथ मैदान में बने रहते हैं और अपने धर्म के मार्ग में मजबूती और स्थिरता के साथ डटे रहते हैं।
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